खसरा नंबर 455/7 को चिन्हांकित करने एवं जगन्नाथ ठाकुर द्वारा कुटरचना कर भरत खंडेल पर अत्याचार करने पर एट्रोसिटी एक्ट तहत कार्रवाई करने की मांग

भरत खण्डेल पिता स्व. प्रहलाद खण्डेल, उम्र 42 वर्ष, गोवर्धन खंडेल, पिता स्व. रामसिंह खंडेल, उम्र 52 वर्ष दोनों जाति सतनामी (अनुसूचित जाति वर्ग), निवासी वार्ड क्रमांक 07, पंचशील बस स्टैंड, घरघोड़ा, थाना व तहसील घरघोड़ा, जिला रायगढ़ (छ.ग.), अपने परिवार सहित आज दिनांक 25/09/2025 से घरघोड़ा नगर में आमरण अनशन पर बैठा हुआ है।

उसके पूर्वजों से काबिज भूमि खसरा नंबर 455/7 (४५५/७) रकबा 0.162 हेक्टेयर पर स्थित भूमि पर पचास वर्षों पुराने मकान को राजस्व अधिकारियों द्वारा राजनीतिक दबाव एवं जातिगत पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर 23.09.2025 को जबरन तोड़ दिया गया। इस अवैधानिक कार्रवाई से उनका पूरा परिवार बरसात के मौसम में बेघर हो गया है। न्यायालय में मामला लंबित होने के बावजूद प्रशासन द्वारा बुलडोजर चलाना मेरे संवैधानिक अधिकारों का खुला हनन है।

उक्त अन्यायपूर्ण कार्रवाई के खिलाफ तथा उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा हेतु आज समाज के लोग निम्नलिखित मांग को लेकर प्रशासन के साथ बैठक चाहते हैं। और उपरोक्त समस्या का उचित हल चाहते हैं

बैठक पूर्व मुख्य मांग इस तरह से चाही गई है।

  1. मूल खसरा नं 455 का बटांकन चांदा मुनारा के साथ किया जाए। सरकारी छोटे झाड़ के जंगल 1973/74 से 77/78 तक 455/7 (४५५/७)
  2. खसरा नं 455/6 (४५५/६) और 455/7 (४५५/७)का चांदा मुनारा करके स्पष्ट पहचान कराया जाए।
  3. खसरा नंबर 455/7 (४५५/७) को कूटरचना कर 455/6 (४५५/६) बनाया गया है जिसकी जांच हो ।
  4. जगन्नाथ ठाकुर द्वारा खसरा नंबर
    455/7 (४५५/७) को 455/6(४५५/६) बताकर कूट रचित करके न्यायालय को गुमराह करते हुए भरत खंडेल को मानसिक शारीरिक आर्थिक रूप से क्षति पहुंचाने के कारण जगन्नाथ ठाकुर के खिलाफ एट्रोसिटी एक्ट के तहत कानूनी कार्रवाई हो।
  5. राजस्व रिकार्ड में कूच रचना एवं छेड़छाड़ को बिना तहकीकात किए 455/7 (४५५/७) को 455/6 (४५५/६) बताकर मकान तोड़वाने वाले पटवारी, राजस्व निरीक्षक, तहसीलदार के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई हो क्योंकि मकान तोड़ने के बावजूद
  6. कब्जा वारंट वापस किया गया है।कब्जा वारंट वापस होने और दुकान मकान के टूट जाने के कारण हुए क्षति की उचित मुआवजा राशि दिया जाए।

7.455/7 (४५५/७) की स्पष्ट पहचान करके शासकीय पट्टा बनाकर दिया जाए क्योंकि भविष्य में फिर विवाद की स्थिति न हो।

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