बिल्हा रेल्वे फाटक का जाम बना आफत सभी परेशान

स्वदेश टाइम्स: नगर की बिल्हा फाटक  बंद रहने से आए दिन की समस्या है। लोगों को जान जोखिम में डालकर फाटक के नीचे से गुजरने को मजबूर होना पड़ता है, जिससे हादसे हो जाते हैं। कुछ लोगों को जान तक गंवानी पड़ी है। पत्रकार एस प्रसाद के पूछे जाने पर रेल्वे विभाग के एक अफसर का कहना है कि मुंबई हावड़ा मुख्य रेल मार्ग होने के कारण गाड़ियों की आवाजाही अधिक होती है/ इसलिए लंबे समय तक फाटक बंद करना पड़ता है/

बिल्हा रेल्वे फाटक अक्सर बंद रहता है। ऐसे में मरीजों की एंबुलेंस जाम में फंस जाती हैं। कई मौकों पर गंभीर रोगियों की जान पर बन आती है। इस समय ठंड पड़ रही है। बच्चे और बुजुर्ग अक्सर बीमार हो जाते हैं। गांवों से उन्हें सरकारी अस्पताल लाया जाता है और वे बिल्हा मार्ग से आना चाहें तो अक्सर जाम में फंस जाते हैं। वहीं जिला मुख्यालय पहुंचना हो तो देर हो जाती है, क्योंकि क्रासिंग कितने घंटों के लिए बंद हो जाए, कुछ पता नहीं। दूसरी ओर फाटक बंद होने से व्यापारियों को परेशानी होती है। फाटक पार के सैंकड़ों गांवों के किसान मजदूरी करने और अपनी फसलें बेचने कस्बे आते हैं। किसान कस्बे की साप्ताहिक बाजार से सामान खरीदते और बेचते हैं। व्यापारी इसी मार्ग से माल की आबाजाही कर अन्य कस्बों में बेचते हैं। नगर के स्कूलों में फाटक पार के गांवों से रोजाना सैकड़ों छात्र-छात्राएं आते हैं, लेकिन फाटक उनकी पढ़ाई में रुकावट बना है। फाटक के बंद होने के कारण छात्र-छात्राएं समय पर स्कूल नहीं पहुंच पाते। स्नातक, परास्नातक, इंटर एवं हाईस्कूल से लेकर प्राथमिक व जूनियर कक्षाओं की परीक्षाओं के समय अक्सर फाटक बंद होने से छात्रों की परीक्षाएं छूट जाती हैं या फिर समय पर परीक्षा केंद्र नहीं पहुंच पाते हैं।

बिल्हा क्षेत्रवासी समस्या के समाधान की मांग करते हैं। उनकी मांग है कि क्रासिंग पर ओवर ब्रिज का निर्माण किया जाए/फिर हाल बिल्हा फाटक के समीप अंडर ब्रिज निर्माण का कार्य का शुरू कर दिया गया है लेकिन कार्य अति धीमी गति से चल रही है,और गुणवत्ता हिन् कार्य हो रहा है / 12 घंटों के दौरान 70 से अधिक ट्रेन फाटक के बीच होकर आती-जाती हैं। प्रत्येक ट्रेन के पास होने में दस से 15 मिनट लगते हैं। इस दौरान फाटक लम्बे समय तक बंद रहता है।

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