नव वर्ष केवल तारीख बदलने का नाम नहीं है, यह जड़ हो चुकी व्यवस्था को चुनौती देने और सड़ चुके तंत्र को बदलने का संकल्प है। यह उन सवालों को फिर से ज़िंदा करने का वक्त है, जिन्हें सत्ता ने दबा दिया, और उन आवाज़ों को ताक़त देने का समय है, जिन्हें वर्षों से कुचलने की कोशिश की गई।
बीता हुआ वर्ष गवाह है कि सच बोलना अब आसान नहीं रहा, सवाल पूछना अपराध बनाया जा रहा है और अन्याय को “व्यवस्था” का नाम देकर स्वीकार करवाया जा रहा है। लेकिन इतिहास गवाह है—हर क्रांति की शुरुआत एक सवाल से ही हुई है।

यह नया वर्ष हमें याद दिलाता है कि खामोशी सबसे बड़ा अपराध है। जब अन्याय हो और हम चुप रहें, तब हम भी अपराधी बन जाते हैं। इसलिए यह साल समझौते का नहीं, प्रतिरोध का साल हो। यह साल डर के खिलाफ खड़े होने का, सच के साथ डटे रहने का और जनता के हक़ के लिए लड़ने का साल हो।
नव वर्ष 2026 में संकल्प लें कि—
हम झूठ को सच नहीं मानेंगे,
अन्याय को नियति नहीं मानेंगे,
और सत्ता के सामने झुकने को समझदारी नहीं कहेंगे।
यह वर्ष उन किसानों, मज़दूरों, आदिवासियों, महिलाओं, पत्रकारों और युवाओं के नाम हो, जिनकी आवाज़ को दबाने की कोशिश की गई। यह साल सत्ता की नहीं, जनता की ताक़त को पहचानने का साल बने।
क्रांति का अर्थ हिंसा नहीं, चेतना है। बदलाव का रास्ता तलवार से नहीं, विचार से निकलता है। जब विचार जागते हैं, तब साम्राज्य हिलते हैं।
लेख :
पत्रकार -एस प्रसाद
