स्वदेश टाइम्स :-आदिवासी के हित को समझकर अपने पद व राजनीति से सन्यास लेने का दम दिखाने वाले पूर्व आबकारी मंत्री व छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ विधायक को क्या उनके अनुसूचित जनजाति वर्ग से संबंध रखने के कारण जमानत नहीं दी जा रही है।
जाति विशेष का बोलबाला वाले परिवारवाद जातिवाद का अड्डा कॉलेजियम प्रणाली को हर हाल में खत्म करते हुए राष्ट्रीय न्यायिक सेवा की गठन करना चाहिए।
ताकि संवैधानिक मूल्यों को समझने वाले भी चयनित होकर न्यायपालिका में पहुंचकर न्यायिक व्यवस्था को निष्पक्ष एवं पारदर्शी बनाने में अपनी योगदान निभा सके।
छत्तीसगढ़ के शराब घोटाला में एक को मिली बेल और दूसरे के हिस्से में जेल समझ से परे है।
