, हाल ही में एनसीईआरटी की किताबों में शराब और धूम्रपान के बारे में सामग्री शामिल करने पर विवाद हुआ है। शिक्षाविदों का कहना है कि इससे छात्रों पर गलत प्रभाव पड़ेगा, खासकर भारतीय संस्कृति में शराब और धूम्रपान को अच्छा नहीं माना जाता है। वहीं, कुछ ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, भारत में शराब का एक लंबा इतिहास रहा है, और इसका उपयोग कुछ धार्मिक और आयुर्वेदिक ग्रंथों में भी मिलता है
विवाद
- एनसीईआरटी की किताबों में शराब और धूम्रपान के बारे में अध्याय शामिल करने पर विवाद हो रहा है।
- शिक्षाविदों का कहना है कि इससे छात्रों पर गलत प्रभाव पड़ेगा, खासकर भारतीय संस्कृति में शराब और धूम्रपान को अच्छा नहीं माना जाता है।
- उनका तर्क है कि इन अध्यायों को पाठ्यक्रम से हटाया जाना चाहिए।
शराब का इतिहास:
- शराब का भारत में एक लंबा इतिहास रहा है।
- वेदों में सोम रस का उल्लेख है, जो एक प्रकार की शराब है।
- आयुर्वेद में, चरक संहिता में सोम रस के संयमित उपयोग की सलाह दी गई है।
- मौर्य काल में भी शराब को लेकर शासकों का नजरिया रहा है।
- मुगलों के शासनकाल में, शराब को लेकर कोई एक दृष्टिकोण नहीं था, यह शासक पर निर्भर करता था।
निष्कर्ष:
शराब और किताबों पर समाचारों में, एनसीईआरटी की किताबों में शराब और धूम्रपान के बारे में सामग्री शामिल करने पर विवाद है, और कुछ शिक्षाविद इसे पाठ्यक्रम से हटाने की मांग कर रहे हैं। वहीं, भारत में शराब का एक लंबा इतिहास रहा है, और इसका उपयोग कुछ धार्मिक और आयुर्वेदिक ग्रंथों में भी मिलता है।
