लेखक,एस प्रसाद
स्वदेश टाइम्स :मीडिया पावर (Media Power) से तात्पर्य जनसंचार माध्यमों (प्रिंट, टीवी और डिजिटल/सोशल मीडिया) की उस व्यापक क्षमता से है, जो समाज की सोच, जनमत, और राजनीतिक निर्णयों को आकार देने के साथ-साथ सरकारों और निगमों की नीतियों को प्रभावित करने की असीम शक्ति रखती है।
प्रशासनिक, राजनीतिक एवं सामाजिक न्याय प्रणाली से हार कर व्यक्ति अंतिम सत्यता के रूप में भारतीय प्रेस एवं मीडिया की सहारा लेता है /हालांकि यह बात भी सत्य है की कुछ प्रशासनिक तंत्र में पदस्थ मुलाजिम आज की तारीख में पत्रकार एवं पत्रकारिता को प्राथमिकता नहीं देते हैं लेकिन विकट संकट की स्थिति उत्पन्न होने पर, प्रेस और मीडिया से सहायता की गुहार लगाते हैं इस बात को नकारा नहीं जा सकता /
भारतीय प्रेस को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चौथा स्तंभ (फोर्थ स्टेट) कहा गया है/
( 1)न्यायपालिका
(2)कार्यपालिका
(3) विधायिका के बाद
(4)चौथा स्थान पत्रकारिता का है पत्रकारिता का मुख्य कार्य इन तीनों पर अपनी निगाह रखना है इसलिए पत्रकार और पत्रकारिता की सत्यता एवं निष्ठा को बनाए रखें यह अधिकारिक एवं संवैधानिक रूप से मान्य एवं देश हित के लिए सकारात्मक पहलू है /देश की आजादी में प्रेस की अहम भूमिका रही
मीडिया की मुख्य शक्तियाँ
जनमत निर्माण: मीडिया किसी भी मुद्दे को रातों-रात राष्ट्रीय बहस बना सकता है और जनता की राय को किसी खास दिशा में मोड़ने की ताकत रखता है।
लोकतंत्र का प्रहरी: स्वतंत्र मीडिया सरकार के कामकाज पर नज़र रखकर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करता है।
एजेंडा सेटिंग: समाज को क्या देखना, सुनना और सोचना है, यह तय करने में मीडिया की बड़ी भूमिका होती
डिजिटल मीडिया का प्रभावआज के समय में सोशल मीडिया (जैसे , Facebook, Instagram) के उदय ने पारंपरिक मीडिया के एकाधिकार को तोड़ दिया है। इसके ज़रिए आम नागरिक भी अपनी बात सीधे लाखों लोगों तक पहुँचा सकते हैं।
मीडिया पावर के दुरुपयोग और चुनौतियाँअत्यधिक ताकत होने के कारण कई बार मीडिया का दुरुपयोग भी देखने को मिलता है:
फेक न्यूज़ और दुष्प्रचार: झूठी जानकारी तेज़ी से फैलती है और समाज में भ्रम या तनाव पैदा कर सकती है।
पेड न्यूज़ और पक्षपात: राजनीतिक या व्यावसायिक लाभ के लिए एकतरफा या प्रायोजित ख़बरें दिखाना। सनसनीखेज पत्रकारिता: टीआरपी (TRP) या लाइक्स बढ़ाने के लिए गंभीर मुद्दों की जगह सनसनीखेज खबरों को प्राथमिकता देना।
अकुशल पत्रकारिता: आज के दौर में जिस प्रकार से तथाकथित, शिक्षाविहीन पत्रकारों का अभ्युदय हुआ है निश्चित तौर पर आने वाले समय में भारतीय पत्रकारिता के लिए संकट की स्थिति निर्मित होगी,क्योंकि अकुशल पत्रकारिता से देश में हित के बजाय अहित होने की संभावना बनी रहती है तथ्यों की जानकारी के अभाव में सत्य का असत्य होने की संभावना ज्यादा है/
