
स्वदेश टाइम्स :-भारत में शराब और पुलिस का संबंध कानून व्यवस्था, सार्वजनिक सुरक्षा और आबकारी नियमों से जुड़ा है। पुलिस का काम अवैध शराब की बिक्री और निर्माण (अवैध कारोबार) पर रोक लगाना, शराब पीकर वाहन चलाने (
Drunk & Drive) या सार्वजनिक स्थान पर हुड़दंग मचाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करना है।
- अवैध शराब पर कार्रवाई: पुलिस अवैध शराब के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर छापेमारी करती है। अवैध शराब बेचने पर सख्त सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है।
- शराब पीकर वाहन चलाना: मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 185 के तहत शराब के प्रभाव में वाहन चलाना अपराध है। इसमें 6 महीने तक की कैद और/या 2,000 रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
- सार्वजनिक स्थान पर नशा: सार्वजनिक स्थान पर नशा करने और उपद्रव करने पर पुलिस की ओर से गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
- हवालात की सजा: कुछ मामलों में, शराब पीकर हंगामा करने वालों को रात भर हवालात में रखा जा सकता है।
- पुलिस का व्यवहार: ड्यूटी पर शराब का सेवन करने पर पुलिस अधिकारियों को बर्खास्त किया जा सकता है।
पुलिस और शराब का अनैतिक सांठगांठ:
कई रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि कुछ मामलों में, पुलिस और अवैध शराब विक्रेताओं के बीच मिलीभगत के कारण अवैध कारोबार फलता-फूलता है, जो सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा है।
👉आम नागरिकों को पुलिस, आबकारी पुलिस की कार्यप्रणाली पर संसय*
* अवैध शराब बिक्री एवं निर्माण के लिए छत्तीसगढ़ में आबकारी विभाग बना हुआ है जो की अपने उत्तरदायित्व की निर्वहन कर रहा है,परंतु ऐसे मामले में थाना पुलिस भी कार्यवाही करती है लेकिन खनिज सम्बन्धी अपराधों के विषय पर यह हवाला दिया जाता है कि इसके लिए खनिज विभाग बना हुआ है इसमें थाना पुलिस हस्तक्षेप नहीं कर सकती जबकि शराब के लिए भी एक आबकारी विभाग का गठन किया गया है यह एक संसय की स्थिति है
