स्वदेश टाइम्स :-भारत में पत्रकारिता की अस्मिता और विश्वसनीयता गंभीर संकट में है, जिसका मुख्य कारण कॉर्पोरेट दबाव, ‘पेड न्यूज’, तथाकथित पत्रकार,अनैतिक रिपोर्टिंग और राजनैतिक दबाव है
पत्रकारों की सुरक्षा, विशेष रूप से स्वतंत्र पत्रकारिता पर हमलों, धमकियों और निगरानी (पेगासस आदि) के कारण स्वतंत्रता कम हो रही है, जिससे स्व-सेंसरशिप बढ़ रही है। यह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के लिए एक गहरा खतरा है /

पत्रकारिता की अस्मिता पर प्रमुख खतरे:
- व्यावसायिकता और दबाव: कार्पोरेट जगत का मीडिया पर एकाधिकार, टीआरपी (TRP) की दौड़ और विज्ञापन के लिए संपादकीय स्वतंत्रता से समझौता।
- पेड न्यूज और अनैतिकता: चुनाव के दौरान ‘पेड न्यूज’ का प्रचलन, एडवरटोरियल (विज्ञापन+खबर) के बीच अंतर खत्म होना, और पत्रकारों का भ्रष्टाचार।
- सुरक्षा और हिंसा: पत्रकारों पर शारीरिक हमले, धमकियां और हत्या के मामलों में उच्च दर।
- कानूनी और राजनीतिक शिकंजा: राजद्रोह कानून (धारा 124-ए) और अन्य कानूनों का उपयोग करके आलोचनात्मक रिपोर्टिंग को दबाना।
- निगरानी और उत्पीड़न: पत्रकारों की जासूसी, ऑनलाइन उत्पीड़न, और विशेष रूप से महिला पत्रकारों पर बढ़ते हमले।
- निष्क्रिय संस्थाएं: प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया जैसी नियामक संस्थाओं का बेअसर होना।
- योग्यता हिन् व्यक्तियों द्वारा की जाने वाली पत्रकारिता: विगत कुछ वर्षों में पत्रकारिता की क्षेत्र में पत्रकारों की काफी ज्यादा वृद्धि हुई है लेकिन वास्तव में साक्ष्य संकलन अवलोकन किया जाए तो वास्तविक पत्रकारों की संख्या कम है
यह स्थिति न केवल पत्रकारों के लिए, बल्कि भारत में स्वतंत्र और निष्पक्ष सूचना के प्रवाह के लिए चिंताजनक है।
क्या आप चाहते हैं कि हम इस विषय पर किसी विशिष्ट रिपोर्ट, जैसे कि पेगासस प्रोजेक्ट या छत्तीसगढ़ में पत्रकारों की स्थिति, पर और जानकारी साझा करें?
