स्वदेश टाइम्स :-70 के दशक का वो सुपरस्टार, जिसके नाम का जादू ही बॉक्स ऑफिस की गारंटी बन गया था – वो थे राजेश खन्ना । हिंदी सिनेमा के पहले “सुपरस्टार” कहे जाने वाले काका का स्टारडम ऐसा था, जो आज भी मिसाल माना जाता है।🙌
साल 1969 में रिलीज हुई ‘आराधना’ ने उन्हें रातों – रात आसमान पर पहुंचा दिया। इस फिल्म में उनके साथ शर्मिला टैगोर नजर आई थीं, और यहीं से शुरू हुआ वो सुनहरा दौर जब हर तरफ सिर्फ राजेश खन्ना का नाम गूंजता था। 1969 से 1975 के बीच उन्होंने लगातार 14 सुपरहिट फिल्में देकर इतिहास रच दिया – ऐसा रिकॉर्ड आज भी बेमिसाल माना जाता है।👌
मुमताज़ के साथ उनकी जोड़ी खासतौर पर दर्शकों की पसंदीदा रही। उनकी फिल्मों के पोस्टर पर नाम भर से टिकट खिड़की पर लंबी लाइनें लग जाती थीं। लड़कियां उन्हें खून से खत लिखती थीं, उनकी तस्वीरों से शादी कर लेती थीं, और जहां उनकी सफेद कार रुकती – वो कार गुलाबी लिपस्टिक के निशानों से भर जाती थी। कहा जाता है कि दीवानगी इतनी थी कि कुछ प्रशंसक उनकी कार की धूल से मांग तक भर लिया करते थे।🤗
उनका अंदाज़ – गर्दन को हल्का टेढ़ा करना, घनी जुल्फों के साथ पलकें झपकाना और खास स्टाइल में मुस्कुराना – आज भी याद किया जाता है। यही वो करिश्मा था जिसने उन्हें भीड़ से अलग बनाया।
उनकी यादगार फिल्मों की बात करें तो ‘आराधना’ के अलावा कटी पतंग, आनंद, हाथी मेरे साथी, सच्चा झूठा, आप कि कसम जैसी फिल्मों ने उन्हें अमर बना दिया।🎬
करीब तीन दशक लंबे करियर में उन्होंने 180 से ज्यादा फिल्मों में काम किया, जिनमें अधिकांश में वे मुख्य भूमिका में रहे। उनका स्टारडम सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं था, बल्कि एक सांस्कृतिक लहर बन चुका था। वाकई लोग सच कहते थे ऊपर आका निचे काका । ✨
जब राजेश खन्ना ने 18 जुलाई 2012 को इस दुनिया को अलविदा कहा, तो मानो पूरा देश शोक में डूब गया। मुंबई की सड़कों पर ऐसा जनसैलाब उमड़ा कि संभालना मुश्किल हो गया। नमन् पहले सुपरस्टार 💫
