कादर खान हिंदी सिनेमा का एक महान अभिनेता

स्वदेश टाइम्स :-कादर खान का बोलने का अंदाज़, डायलॉग में ठहराव और शब्दों की ताकत इतनी अलग थी कि उनकी नकल करना भी किसी कलाकार के लिए आसान नहीं था। यही वजह है कि आज भी जब कोई उनकी आवाज़ और अंदाज़ दोहराता है, तो लगता है जैसे कादर खान खुद सामने खड़े होकर अपने मशहूर डायलॉग बोल रहे हों।

कादर खान हिंदी सिनेमा का एक ऐसा नाम हैं जिनके बिना 80–90 के दशक की फिल्मों की कल्पना भी अधूरी लगती है। वे सिर्फ एक अभिनेता ही नहीं थे, बल्कि बेहतरीन डायलॉग राइटर, कॉमेडियन और लेखक भी थे। उन्होंने अपनी जिंदगी में संघर्ष भी देखा और ऐसी सफलता भी पाई कि उनके लिखे संवाद आज भी लोगों की ज़ुबान पर हैं।

कादर खान का जन्म 22 अक्टूबर 1937 को Kabul में हुआ था। उनका परिवार बाद में Mumbai आकर बस गया। बचपन आसान नहीं था—घर की आर्थिक स्थिति कमजोर थी और कई बार दो वक्त की रोटी के लिए भी संघर्ष करना पड़ता था। लेकिन पढ़ाई में वे बेहद तेज थे। उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और मुंबई के एक कॉलेज में प्रोफेसर भी रहे।

कहानी में मोड़ तब आया जब एक नाटक के दौरान उनकी अदाकारी और लिखने की प्रतिभा ने अभिनेता Dilip Kumar का ध्यान खींचा। दिलीप कुमार इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने कादर खान को फिल्म Sagina में काम करने का मौका दिलाया। यहीं से उनकी फिल्मी यात्रा शुरू हुई।

कादर खान ने सिर्फ अभिनय ही नहीं किया, बल्कि 300 से ज्यादा फिल्मों के लिए संवाद लिखे। उन्होंने कई सुपरहिट फिल्मों के डायलॉग लिखे, जिनमें Amar Akbar Anthony, Coolie और Muqaddar Ka Sikandar जैसी फिल्में शामिल हैं।

अभिनेता के रूप में भी उनकी जोड़ी कई सितारों के साथ खूब जमी। खासकर Govinda के साथ उनकी कॉमेडी लोगों को बहुत पसंद आई। Hero No. 1, Aankhen और Dulhe Raja जैसी फिल्मों में उनका अंदाज आज भी याद किया जाता है।

कादर खान की खासियत यह थी कि वे कॉमेडी, विलेन और गंभीर किरदार—तीनों में बराबर जान डाल देते थे। उनकी भाषा पर पकड़ इतनी मजबूत थी कि वे आम आदमी की बोली को फिल्मों में बिल्कुल असली अंदाज में पेश कर देते थे।

31 दिसंबर 2018 को Toronto में उनका निधन हो गया, लेकिन उनके लिखे संवाद और निभाए किरदार आज भी भारतीय सिनेमा की यादों में जिंदा हैं।

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